ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मेजर जनरल मोहसिन रज़ाई ने यूरोपीय सरकारों को संबोधित करते हुए कहा कि, वे इस्राईली शासन की आतंकवादी कार्रवाइयों का समर्थन करने के परिणाम भुगत रहे हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब यूरोप, ईरान के साथ युद्ध के कारण अपनी अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे अरबों यूरो के बोझ को लेकर चिंता जता रहा है।
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मेजर जनरल मोहसिन रज़ाई ने यूरोपीय सरकारों को संबोधित करते हुए कहा कि, वे इस्राईली शासन की आतंकवादी कार्रवाइयों का समर्थन करने के परिणाम भुगत रहे हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब यूरोप, ईरान के साथ युद्ध के कारण अपनी अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे अरबों यूरो के बोझ को लेकर चिंता जता रहा है।
शनिवार को अपने सोशल मीडिया अकाउंट ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में रज़ाई ने लिखा, “अभी कल तक यूरोप को इस्राईली शासन के गंदे कामों पर गर्व था। आज वह शिकायत कर रहा है कि, ईरान के साथ युद्ध पर उसे अरबों यूरो खर्च करने पड़ रहे हैं। जब आप युद्ध अपराधों का समर्थन कर रहे थे, तब क्या आपने सोचा था कि इसका ख़ामियाज़ा आपको भी भुगतना पड़ेगा?
युद्ध और आतंकवाद की क़ीमत चुकानी पड़ती है। अब आपकी बारी है क़ीमत चुकाने की। जनरल रज़ाई बार-बार इस बात पर जोर देते रहे हैं कि, ईरान के प्रतिरोध ने उसके विरोधियों को वास्तविक की,क़ीमत मत चुकाने पर मजबूर किया है।
हालिया बयानों में उन्होंने कहा है कि अमेरिका से भी अधिक शक्तिशाली ताक़तों ने ईरान को अपने अधीन करने की कोशिश की, लेकिन अंततः वे इतिहास के “कूड़ेदान” में पहुंच गईं। उन्होंने यह भी कहा है कि तेहरान ने अभी तक अपनी पूरी ताक़त का इस्तेमाल नहीं किया है।
यह टिप्पणियां ऐसे समय आई हैं, जब यूरोपीय देश युद्ध की भारी आर्थिक कीमत को स्वीकार कर रहे हैं। जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने शुक्रवार को कहा कि युद्ध के कारण ऊर्जा की कीमतों में हुई वृद्धि से पिछले आठ महीनों में यूरोप को 100 अरब यूरो (112 अरब डॉलर) से अधिक का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा है। उन्होंने युद्ध समाप्त करने के लिए कूटनीतिक समाधान की अपील की।
उन्होंने कहा,ऊर्जा महंगी होने के कारण यूरोप के व्यवसायों और उपभोक्ताओं को इस संघर्ष के परिणामस्वरूप 100 अरब यूरो से अधिक का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ा है। इसलिए इस संघर्ष को जल्द से जल्द समाप्त कराने में हमारा आर्थिक हित भी जुड़ा हुआ है। मर्ज़ ने बातचीत के ज़रिए समाधान निकालने की अपील करते हुए कहा, “इस संघर्ष का समाधान सैन्य तरीक़े से नहीं निकाला जा सकता।
स्पेन के प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज़ और यूरोपीय संघ के ऊर्जा अधिकारियों ने भी इसी तरह के आंकड़ों का हवाला दिया है। उन्होंने 28 फरवरी को अमेरिका और इस्राईल की आक्रामक कार्रवाई शुरू होने के बाद से जीवाश्म ईंधन के आयात पर बढ़ते खर्च और उपभोक्ताओं पर पड़ रहे आर्थिक बोझ की ओर ध्यान दिलाया है।
यूरोपीय नागरिकों को भी इस अवैध युद्ध की बढ़ती क़ीमत चुकानी पड़ रही है। संघर्ष और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में ईरान की रक्षात्मक कार्रवाइयों से जुड़ी बाधाओं के कारण यूरोपीय संघ का जीवाश्म ईंधन आयात बिल लगभग 100 अरब यूरो बढ़ गया है।
यूरोपीय संघ के सांसदों ने संकट को और गहरा करने के लिए अमेरिका और तेल अवीव को जिम्मेदार ठहराना तेज़ कर दिया है, जबकि उनके अनुसार, ब्रसेल्स ने बड़े पैमाने पर इस स्थिति को नजरअंदाज़ किया।













