हमास का पत्रः अल्लाह अलअक़सा की आज़ादी के बाद उसमें नमाज़ पढ़ने का गौरव ईरान के राष्ट्रपति को दे!

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हमास का पत्रः अल्लाह अलअक़सा की आज़ादी के बाद उसमें नमाज़ पढ़ने का गौरव ईरान के राष्ट्रपति को दे!

फ़िलिस्तीन के हमास संगठन के नेता इसमाईल हनीया ने इस्लामी गणतंत्र ईरान के राष्ट्रपति डाक्टर हसन रूहानी को एक पत्र लिखा है और मस्जिदुल अक़सा के ख़िलाफ़ ज़ायोनी शासन की अतिक्रमणकारी हरकतों पर प्रकाश डाला है।

इसमाईल हनीया ने ईरान के अलावा दूसरे भी इस्लामी देशों के राष्ट्राध्यक्षों के नाम पत्र लिखे हैं।

हमास के नेता इसमाईल हनीया ने अपने पत्र में लिखा कि अतिग्रहणकारी ज़ायोनी शासन मस्जिदुल अक़सा पर कब्ज़ा करने की अपनी योजना पूरी करने के प्रयास में है और वह मस्जिदुल अक़सा का संचालन अपने एकाधिकार में लेना चाहता है। मस्जिदुल अक़सा आप सबसे मदद की गुहार लगा रही है, ज़ायोनी शासन इस मस्जिद पर जो नए तथ्य थोपने के प्रयास कर रहा है उस पर चुप नहीं रहा जा सकता।

हमास संगठन के राजनैतिक विभाग के प्रमुख ने अपने पत्र में आगे लिखा कि अरब जगत और ओआईसी ने मस्जिदु अक़सा के समर्थन में कई प्रस्ताव पारित किए हैं और अब समय आ गय है कि बैतुल मुक़द्दस के निवासियों की मदद के लिए इन प्रस्तावों को लागू किया जाए।

इसमाईल हनीया ने अपने पत्र में लिखा कि इस्लामी व अरब देशों के पास अनेक कूटनयिक, वैधानिक व प्रचारिक साधन मौजूद हैं और आज मस्जिदु अक़सा को इन साधनों की ज़रूरत है ताकि इस तरह ज़ायोनी शासन पर दबाव डाला जा सके। इस संदर्भ में कम से कम यह किया जा सकता है कि ज़ायोनी शासन को अलग थलग करने के लिए क़दम उठाए जाएं।

इसमाईल हनीया ने अपने पत्र में लिखा कि इस्लामी व अरब सरकारों ने साबित किया है कि उनके दिल आज भी मस्जिदुल अक़सा की मुहब्बत में धड़कते हैं, इसी लिए कई इस्लामी देशों में अलअक़सा के लिए गतिविधियां शुरु हो गईं। यदि आज हम ज़ायोनी शासन पर मिलकर दबाव डाल सकें तो मस्जिदुल अक़सा के ख़िलाफ़ ज़ायोनी शासन के अतिग्रहणकारी मंसूबों पर हमेशा के लिए रोक ल गा सकते हैं।

हमास के नेता ने अपने पत्र में लिखा कि इस एतिहासिक मोड़ पर हम आशा करते हैं कि इस्लामी जगत मस्जिदुल अक़सा के समर्थन में एकजुट हो जाएगा। पत्र में इसमाईल हनीया ने लिखा कि मस्जिदुल अक़सा पर केवल मुसलमानों का अधिकार है।

हमास के नेता इसमाईल हनीया ने कहा कि हम कामना करते हैं कि मस्जिदुल अक़सा स्वतंत्र होगी और इस्लामी गणतंत्र ईरान के राष्ट्रपति इसमें नमाज़ अदा करने का गौरव प्राप्त करेंगे।

 

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