कर्बला ए मुअल्ला में आयोजित ग्यारहवाँ अंतरराष्ट्रीय अरबईन अवॉर्ड चुने हुए फ़नकारों और मीडिया नुमाइंदों को एज़ाज़ देने के साथ सम्पन्न हो गया। इस मौक़े पर पैग़ाम-ए-आशूरा को आलमी सतह पर पहुँचाने में फ़न और ज़राए-ए-इबलाग़ की अहम और बुनियादी भूमिका पर ज़ोर दिया गया।
कर्बला ए मुअल्ला में आयोजित इस अवॉर्ड की इख़्तितामी तक़रीब में फ़न और मीडिया से वाबस्ता शख़्सियतों को सम्मानित किया गया और इस बात को रौशन किया गया कि अरबईन का पैग़ाम दुनिया तक पहुँचाने में रचनात्मक अभिव्यक्ति और मीडिया कितना असरदार ज़रिया है।
ग्यारहवें अंतरराष्ट्रीय अरबईन अवॉर्ड की इख़्तितामी तक़रीब सोमवार की शाम 15 रजब 1447 हिजरी को कर्बला में इस्लामी जम्हूरिया-ए-ईरान के कौंसुलेट में मुनक़िद हुई। तक़रीब में ईरान, इराक़ और दीगर ममालिक से ताल्लुक़ रखने वाले उलमा, दानिशवर, फ़न और मीडिया की शख़्सियतों के साथ आला हुक्काम ने शिरकत की।
तक़रीब से ख़िताब करते हुए इराक़ में रहबर-ए-मोअज़्ज़म के नुमाइंदे आयतुल्लाह सैयद मुजतबा हुसैनी ने हज़रत ज़ैनब सलामुल्लाह अलैहा की वफ़ात पर ताज़ियत पेश की और कहा कि विलायत से वाबस्तगी का हक़ीक़ी दर्स हज़रत ज़ैनब सलामुल्लाह अलैहा की सीरत से हासिल होता है।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अरबईन अवॉर्ड को फ़न और मीडिया के ज़रिये अरबईन के पैग़ाम को दुनिया तक पहुँचाने की एक मोअस्सिर कोशिश क़रार दिया।
ईरान के सफ़ीर मोहम्मद काज़िम आल-सादिक़ ने ईरान और इराक़ के दरमियान गहरे तारीख़ी और सक़ाफ़ती ताल्लुक़ात का ज़िक्र करते हुए कहा कि अरबईन के अय्याम इस बरादराना रिश्ते के इज़हार का सबसे रौशन मौक़ा हैं। कर्बला के गवर्नर नसीफ़ अल-ख़त्ताबी ने अरबईन को एक अज़ीम, आलमी और इंसानी पैग़ाम का हामिल इज्तिमा क़रार दिया, जो तमाम आज़ाद इंसानों के लिए पैग़ाम रखता है।
तक़रीब में बताया गया कि इस साल 47 ममालिक से 35 हज़ार से ज़्यादा तख़्लीक़ात वसूल हुईं, जो आलमी सतह पर अरबईन के बढ़ते हुए असर-ओ-नुफ़ूज़ की वाज़ेह अलामत हैं। आख़िर में बारहवें अंतरराष्ट्रीय अरबईन अवॉर्ड के पोस्टर की रू-नुमाई भी की गई।













