सदाकत अखबार के मुख्य संपादक ने कहा है कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति और उनकी पत्नी को गिरफ्तार करके किसी दूसरे देश में स्थानांतरित करना अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन और शक्ति के अनियंत्रित इस्तेमाल का प्रतीक है और इससे अंतरराष्ट्रीय शांति, न्याय और विश्वास को गंभीर क्षति पहुँचती है।
सदाकत अखबार के मुख्य संपादक मौलाना सय्यद करामत हुसैन शौर जाफरी ने कहा है कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति और उनकी पत्नी को सैन्य या गुप्त ऑपरेशन के जरिए गिरफ्तार करके किसी अन्य देश में ले जाना केवल एक राजनीतिक या सुरक्षा मामला नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मानदंडों की खुली अवहेलना और बेलगाम शक्ति के प्रयोग का संकेत है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक वैश्विक व्यवस्था की नींव राष्ट्रों की संप्रभुता, जनता के चुनाव के अधिकार और आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने जैसे सिद्धांतों पर रखी गई थी। जब इन सिद्धांतों की अनदेखी करके शक्ति को कानून से ऊपर रखा जाता है, तो दुनिया राष्ट्रों के एक व्यवस्थित समाज से निकलकर ऐसे वातावरण में प्रवेश कर जाती है जहाँ फैसले न्याय की बजाय ताकत से होते हैं, और यही स्थिति शांति, नैतिकता और अंतरराष्ट्रीय विश्वास को गंभीर नुकसान पहुँचाती है।
मौलाना करामत हुसैन जाफरी का कहना है कि यह तरीका न केवल संयुक्त राष्ट्र चार्टर का स्पष्ट उल्लंघन है, बल्कि इस संस्था की भूमिका और उपयोगिता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
उनके अनुसार संयुक्त राष्ट्र का गठन इस उद्देश्य से किया गया था कि ताकतवर देश कमजोर राष्ट्रों के अधिकारों का हनन न कर सकें और वैश्विक विवादों का समाधान कानून और वार्ता के माध्यम से हो। लेकिन जब अंतरराष्ट्रीय कानूनों को नजरअंदाज करके किसी देश के शासक के साथ ऐसा व्यवहार किया जाए और अंतरराष्ट्रीय समुदाय चुप्पी साध ले, तो यह चुप्पी स्वयं एक नैतिक संकट का रूप ले लेती है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि दुनिया के सभी जिम्मेदार हलकों राष्ट्रों, वैश्विक संस्थाओं, मानवाधिकार संगठनों और सजग नागरिकों के लिए जरूरी है कि वे इस मामले पर गंभीरता, विवेक और सिद्धांत-आधारित रुख के साथ ध्यान दें। यह ध्यान किसी टकराव या उकसावे की माँग नहीं करता, बल्कि उस मौलिक सिद्धांत की याद दिलाता है कि वैश्विक व्यवस्था ताकत के बल पर नहीं, बल्कि कानून, न्याय और पारस्परिक सम्मान के माध्यम से कायम रहती है।
मौलाना करामत हुसैन जाफरी ने चेतावनी दी कि अगर आज वेनेजुएला के साथ किए गए इस व्यवहार को नजरअंदाज किया गया, तो भविष्य में यह मिसाल किसी अन्य देश के लिए भी दोहराई जा सकती है। उनके अनुसार वैश्विक विवेक का जागृत रहना, सिद्धांतों की रक्षा और चुप्पी के बजाय जिम्मेदार और संतुलित रुख अपनाना अनिवार्य है, क्योंकि इतिहास हमेशा यह देखता है कि नाजुक पलों में मानवता ने न्याय और कानून के साथ खड़े होने का साहस दिखाया या नहीं।













