हिंदू नेता स्वामी सारंग का सर्वोच्च नेता के नाम शोक संदेश

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हिंदू नेता स्वामी सारंग का सर्वोच्च नेता के नाम शोक संदेश

भारत के प्रसिद्ध हिंदू नेता तथा ग्लोबल पीस फाउंडेशन के संस्थापक श्री स्वामी सारंग ने शहीद रहबर-ए-इंक़िलाब-ए-इस्लामी आयतुल्लाह अल-उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई की शहादत पर सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह सैयद मुज्तबा हुसैनी ख़ामेनेई तथा इस्लामी गणराज्य ईरान के नाम अलग-अलग शोक संदेश भेजते हुए ईरानी राष्ट्र के साथ गहरी एकजुटता व्यक्त की है।

 भारत के प्रसिद्ध हिंदू नेता तथा ग्लोबल पीस फाउंडेशन (SSSGPF) के संस्थापक श्री स्वामी सारंग ने शहीद रहबर-ए-इंक़िलाब-ए-इस्लामी आयतुल्लाह अल-उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई की शहादत पर सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह सैयद मुज्तबा हुसैनी ख़ामेनेई तथा इस्लामी गणराज्य ईरान के नाम अलग-अलग शोक संदेश भेजते हुए ईरानी राष्ट्र के साथ गहरी एकजुटता व्यक्त की है।

रहबर ए इंक़िलाब के नाम अपने पत्र में स्वामी सारंग ने लिखा कि इतिहास में कुछ क्षण ऐसे आते हैं जब शब्द मौन हो जाते हैं और स्वयं इतिहास बोलने लगता है। उन्होंने लिखा कि वे केवल एक जनाज़े में शामिल होने के लिए ईरान नहीं आए, बल्कि उस राष्ट्र के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होने आए हैं, जिसके आँसू पूरी मानवता की भाषा बन चुके हैं। उनके अनुसार किसी महान नेता का निधन केवल एक व्यक्ति की विदाई नहीं होता, बल्कि एक पूरे युग का अंत होता है।

उन्होंने शहीद रहबर-ए-इंक़िलाब को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि यद्यपि उनका पार्थिव शरीर मिट्टी के सुपुर्द कर दिया गया है, किंतु उनका संकल्प, ईमान, चरित्र और विचारधारा सदैव जीवित रहेंगे तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बनेंगे।

उन्होंने लिखा कि कर्बला ने मानवता को यह शिक्षा दी कि मनुष्य की महानता उसकी आयु से नहीं, बल्कि उसके बलिदान से मापी जाती है, और जिस प्रकार हज़रत इमाम हुसैन (अ.) सत्य के मार्ग में अपने बलिदान के कारण अमर हैं, उसी प्रकार सत्य के लिए बलिदान देने वाले कभी भुलाए नहीं जाते।स्वामी सारंग ने पवित्र क़ुरआन की इस आयत का भी उल्लेख किया,जो लोग अल्लाह के मार्ग में शहीद हुए हैं, उन्हें मृत न समझो, बल्कि वे अपने पालनहार के पास जीवित हैं।

उन्होंने कहा कि यह सत्य केवल इस्लाम तक सीमित नहीं, बल्कि सभी सभ्यताओं और धर्मों में समान रूप से स्वीकार किया गया है कि सत्य के मार्ग में प्राण न्योछावर करने वाले सदैव जीवित रहते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि वे एक प्राचीन सनातन सभ्यता के पुत्र होने के नाते ईरान के इस दुःख में समान रूप से सहभागी हैं। उनका मानना है कि जो लोग ईमान, न्याय और मानवीय गरिमा के लिए अपना जीवन समर्पित करते हैं, उनका प्रकाश उनकी सांसारिक मृत्यु के बाद भी मानवता का मार्गदर्शन करता रहता है।

उन्होंने ईरानी जनता, रहबर-ए-इंक़िलाब के परिवार तथा देश के नेतृत्व के लिए धैर्य और दृढ़ता की प्रार्थना करते हुए कहा कि पूरी दुनिया ने ईरान को इस दुखद घटना का सामना गरिमा, आस्था और अडिग संकल्प के साथ करते देखा है।
आयतुल्लाह सैयद मुज्तबा हुसैनी ख़ामेनेई के नाम विशेष शोक संदेश,आयतुल्लाह सैयद मुज्तबा हुसैनी ख़ामेनेई को संबोधित अपने विशेष पत्र में स्वामी सारंग ने लिखा कि कभी-कभी नियति केवल एक परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र की परीक्षा लेती है। उन्होंने कहा कि एक महान पिता और नेता का बिछुड़ जाना ऐसा दुःख है जिसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता, किंतु एक राष्ट्र अपने नेता की स्मृतियों, शिक्षाओं और मिशन को सदैव जीवित रखता है।

उन्होंने लिखा कि आयतुल्लाहिल-उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई केवल एक पिता ही नहीं थे, बल्कि ईमान, ज्ञान, संस्कृति और नेतृत्व के महान प्रतीक थे। उनकी सरपरस्ती ने केवल अपने परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे ईरानी राष्ट्र को आत्मविश्वास, स्थिरता और साहस प्रदान किया। उनके अनुसार अब यह ऐतिहासिक जिम्मेदारी आयतुल्लाह सैयद मुज्तबा हुसैनी ख़ामेनेई के कंधों पर आ गई है कि वे इस महान विरासत को आगे बढ़ाएँ।

स्वामी सारंग ने अपने पत्र में कर्बला के संदेश का स्मरण करते हुए कहा कि हज़रत इमाम हुसैन (अ.) के बलिदान ने सिद्ध कर दिया कि सत्य की विरासत कभी समाप्त नहीं होती, बल्कि हर युग में नई पीढ़ियों तक पहुँचती रहती है। उन्होंने हज़रत इमाम ज़ैनुल आबिदीन (अ.) तथा हज़रत ज़ैनब (स.अ.) की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि इन्हीं महान हस्तियों ने शहादत के संदेश को सदा के लिए जीवित रखा और बलिदान को एक शाश्वत सभ्यतागत संदेश में बदल दिया।

उन्होंने आशा व्यक्त की कि आयतुल्लाह सैयद मुज्तबा हुसैनी ख़ामेनेई अपने पिता के पदचिह्नों पर चलते हुए ईरान की गरिमा, स्वतंत्रता, राष्ट्रीय सम्मान और सांस्कृतिक पहचान को और अधिक सुदृढ़ करेंगे। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन सभ्यता के प्रतिनिधि के रूप में वे केवल सहानुभूति ही नहीं, बल्कि ईरानी जनता के साथ सभ्यतागत एकजुटता का भी प्रदर्शन करते हैं, क्योंकि दोनों सभ्यताएँ सत्य, बलिदान, न्याय और नैतिक साहस जैसे साझा मूल्यों में विश्वास रखती हैं।

पत्र के अंत में स्वामी सारंग ने शहीद रहबर-ए-इंक़िलाब-ए-इस्लामी के लिए उच्चतम दर्जों की प्रार्थना की, ईरानी जनता के लिए धैर्य और दृढ़ता, आयतुल्लाह सैयद मुज्तबा हुसैनी ख़ामेनेई तथा इस्लामी गणराज्य ईरान के नेतृत्व के लिए सफलता तथा समस्त विश्व में शांति, न्याय और मानवता के प्रसार की दुआ की है।

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