बहरैन के गृह मंत्रालय ने शैख़ जासिम अल-हद्दाद की गिरफ्तारी की पुष्टि की, लेकिन अपने बयान में उनका नाम नहीं बताया। इसके बाद सरकार समर्थक सोशल मीडिया अकाउंट्स और समाचार मंचों पर उनके खिलाफ़ अभियान शुरू हो गया।
इन अकाउंट्स की ओर से एक वीडियो क्लिप साझा की गई, जिसमें आरोप लगाया गया कि शैख़ अल-हद्दाद ने 1400 वर्ष पुराने एक ऐतिहासिक विवाद का उल्लेख करते हुए सहाबा का अपमान किया। हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार उनके भाषण में किसी स्पष्ट अपमान या आरोप को साबित करना आसान नहीं है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि गिरफ्तारी के बाद उनके खिलाफ़ सोशल मीडिया पर भड़काऊ अभियान चलाया गया और उनकी छवि को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की गई। इसे केवल सुरक्षा संबंधी कार्रवाई के बजाय धार्मिक मतभेदों को सुरक्षा के नजरिए से देखने की नीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
शैख़ जासिम अल-हद्दाद की गिरफ्तारी को लेकर यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि क्या धार्मिक सभाओं में विचार व्यक्त करने और ऐतिहासिक एवं धार्मिक विषयों पर चर्चा करने के अधिकार पर प्रतिबंध लगाया जा रहा है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस तरह के अभियान का परिणाम उलटा हो सकता है। गिरफ्तारी और प्रचार के कारण लोगों में शैख़ अल-हद्दाद के बारे में जानने और उनके भाषण सुनने की रुचि बढ़ सकती है। इससे उनके धार्मिक मंच और उनकी तकरीरों की पहुँच पहले से अधिक व्यापक होने की संभावना जताई गई है।













