सुप्रीम कोर्ट के उप प्रमुख हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन अली सैफ़ी आमुली ने आयतुल्लाहिल उज़्मा जवादी आमोली से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने अपनी जिम्मेदारियों और गतिविधियों के बारे में जानकारी दी तथा आयतुल्लाह जवादी आमुली के मार्गदर्शन से लाभ उठाया।
मुलाकात के दौरान आयतुल्लाह जवादी आमोली ने समाज में उलमा की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि धार्मिक विद्वानों का मस्जिद, मेहराब और मदरसे से मजबूत संबंध होना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक और सामाजिक जिम्मेदारियों में व्यस्त रहने के बावजूद धार्मिक शिक्षा और छात्रों के प्रशिक्षण से दूरी नहीं बनानी चाहिए।
उन्होंने शहीद डॉ. अली लारीजानी का उल्लेख करते हुए कहा कि वे ज्ञान, मानवीय गुणों और ईमान के मामले में एक असाधारण व्यक्तित्व थे। उनकी कुर्बानी इस बात का प्रमाण है कि इंसान अपने विश्वास और देश की रक्षा के लिए किस हद तक त्याग कर सकता है।
आयतुल्लाह जवादी आमोली ने शहीद सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह सय्यद अली ख़ामेनेई का भी उल्लेख किया और कहा कि उन्होंने इस्लाम, इस्लामी उम्मत की गरिमा और देश की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अपना सब कुछ समर्पित किया। उन्होंने कहा कि अत्याचार और आक्रमण के सामने ईमान, दूरदर्शिता और साहस के साथ खड़ा होना धार्मिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि शहीदों की विरासत केवल उनकी याद तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उनके आदर्शों को समाज के जीवन में अपनाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।













