सच्ची बात कहना और अमानत अदा करना इंसानी जीवन की मज़बूती का आधार है।हुज्जतुल इस्लाम आगा हुसैनी

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सच्ची बात कहना और अमानत अदा करना इंसानी जीवन की मज़बूती का आधार है।हुज्जतुल इस्लाम आगा हुसैनी

हुज्जतुल इस्लाम बहाउद्दीन आगा हुसैनी ने मोहम्मदिया क्षेत्र के शतरक गांव के लोगों के बीच हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु अलैहि व आलिही वसल्लम और हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम के शुभ जन्मदिवस की बधाई देते हुए कहा कि हज़रत मुहम्मद (स.ल.ल.) इस्लाम की महानतम हस्ती और अल्लाह तआला के संदेश और पैग़ाम को पहुंचाने वाले थे।

हुज्जतुल इस्लाम आगा हुसैनी ने कहा कि पैग़म्बरे इस्लाम (स.ल.) की महानता के लिए इतना ही पर्याप्त है कि अल्लाह तआला ने क़ुरआन में उन्हें «या अय्युहर्रसूल» और «या अय्युहन्नबी» कहकर संबोधित किया है और उन्हें पूरी दुनिया के लिए आदर्श इंसान के रूप में प्रस्तुत किया है।

मोहम्मदिया, क़ज़वीन के इमाम ए जुमा ने कहा कि हज़रत मुहम्मद (स.ल.) वास्तव में ऐसे पूर्ण नैतिक चरित्र के मालिक थे, जिसमें इंसानी सद्गुणों और कमालात की सभी खूबियां मौजूद थीं।

उन्होंने कहा कि पैग़म्बरे इस्लाम (स.ल.) सच्ची बात कहने और अमानत अदा करने को जीवन की मजबूती का आधार मानते थे और फरमाते थे कि इन दोनों बातों पर सभी पैग़म्बरों की शिक्षाओं में ज़ोर दिया गया है।

उन्होंने आगे कहा कि पैग़म्बरे इस्लाम (स.ल.) का जीवन, उनका व्यवहार और नैतिक गुण प्रेम, शक्ति, ईमानदारी, दृढ़ता, ऊंची सोच और आत्मिक सुंदरता की प्रेरणा देते थे।

हुज्जतुल इस्लाम आगा हुसैनी ने कहा कि पैग़म्बरे इस्लाम (स.ल.) न केवल नैतिक मूल्यों को बहुत महत्व देते थे, बल्कि अपनी व्यावहारिक सीरत में भी उच्च नैतिक गुणों और महान मानवीय मूल्यों के उत्कृष्ट उदाहरण थे।

उन्होंने कहा कि रसूले अकरम (स.ल.) ऐसे महान नैतिक चरित्र से सुशोभित थे, जिसकी प्रशंसा अल्लाह तआला ने क़ुरआन में इस प्रकार की है: «وَإِنَّكَ لَعَلَىٰ خُلُقٍ عَظِيمٍ» “और निस्संदेह आप महान चरित्र के मालिक हैं।

हुज्जतुल-इस्लाम आगा हुसैनी ने हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ अलैहिस्सलाम के जीवन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इमाम जाफ़र सादिक़ (अ.स.) शिया मुसलमानों के छठे इमाम और फ़िक़्ह-ए-जाफ़री के संस्थापक थे।

उन्होंने एक व्यापक फ़िक़्ही मकतब और ज्ञान-आधारित आंदोलन की नींव रखी तथा विशाल वैज्ञानिक एवं शैक्षिक केंद्र स्थापित करके नक़ली और अक़्ली दोनों प्रकार के ज्ञान में उत्कृष्ट शिष्यों को प्रशिक्षित किया और इस्लामी सभ्यता की गतिशीलता के लिए आधार तैयार किया।

उन्होंने कहा कि इमाम जाफ़र सादिक़ (अ.स.) की शिक्षण पद्धति और सामाजिक आचरण की अपनी विशेष शैली थी, जिसे आज हर व्यक्ति के लिए आदर्श बनाया जाना चाहिए।

हुज्जतुल-इस्लाम आगा हुसैनी ने आगे कहा कि इमाम सादिक़ (अ.स.) ने अपने समय के अनुकूल राजनीतिक अवसर और समाज की अत्यधिक आवश्यकता को देखते हुए अपने पिता की वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक क्रांति को आगे बढ़ाया। उन्होंने एक विशाल ज्ञान-केंद्र और महान विश्वविद्यालय स्थापित किया तथा विभिन्न वैज्ञानिक और धार्मिक क्षेत्रों में बड़ी संख्या में योग्य शिष्यों को प्रशिक्षित किया।

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