आयतुल्लाह अराकी: सार्वजनिक रूप से बिना हिजाब रहना अल्लाह और पैग़म्बर (स.) के खिलाफ़ युद्ध की घोषणा है

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आयतुल्लाह अराकी: सार्वजनिक रूप से बिना हिजाब रहना अल्लाह और पैग़म्बर (स.) के खिलाफ़ युद्ध की घोषणा है

आयतुल्लाह अराकी ने दिज़फ़ूल में क़ारियों और क़ुरआन के हाफ़िज़ों की एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि इस क्षेत्र के लोगों ने इस्लाम और ईरान की उन्नति के लिए महत्वपूर्ण सेवाएं और बलिदान दिए हैं। उन्होंने दज़फ़ूल को देश के एक आदर्श शहर के रूप में बनाए रखने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

उन्होंने देशभर में क़ुरआनी सभाओं को मजबूत करने को तक़वा और आध्यात्मिकता के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।

आयतुल्लाह अराकी ने देश की मौजूदा परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए सशस्त्र बलों की बहादुरी की सराहना की और कहा कि कठिन परिस्थितियों में देश का संचालन आसान नहीं है, इसलिए सरकार और अधिकारियों के प्रयासों की सराहना की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि जनता की महत्वपूर्ण मांगों में से एक यह है कि विशेष रूप से अधिकारी दुश्मन के सामने किसी प्रकार की कमजोरी प्रदर्शित न करें। उन्होंने अधिकारियों से अपने बयानों में सावधानी बरतने का आग्रह करते हुए कहा कि उनके बयान ऐसे नहीं होने चाहिए जिनसे दुश्मन का हौसला बढ़े।

आयतुल्लाह अराकी ने सार्वजनिक रूप से बिना हिजाब रहने के मुद्दे पर कहा कि अधिकारियों को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि यह कानून के खिलाफ़ है और समाज में कानून-विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने बिना हिजाब रहने का विरोध करना अधिकारियों, धर्मगुरुओं तथा मीडिया और सार्वजनिक मंचों से जुड़े लोगों का शरई दायित्व बताया।

उन्होंने कहा कि समाज में बुराई को अच्छाई और अच्छाई को बुराई में बदलने की स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिए।

अंत में आयतुल्लाह अराकी ने लोगों की निरंतर सक्रिय भागीदारी के महत्व पर ज़ोर देते हुए उम्मीद जताई कि अल्लाह की मदद से सत्य के मोर्चे को जल्द अंतिम विजय प्राप्त होगी।

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