आयतुल्लाह शुबैरी ज़ंजानी मिल्लत का अनमोल सरमाया थे। उनकी विद्वतापूर्ण एवं धार्मिक सेवाएं किसी परिचय की मोहताज नहीं थीं। उन्होंने अपना पूरा जीवन आले मोहम्मद (अ.) की सेवा, अध्यापन, शोध, धार्मिक वक्तव्यों और प्रचार-प्रसार में समर्पित किया।
छजुपुरा सादात। आयतुल्लाह शुबैरी ज़ंजानी के निधन पर जनपद बिजनौर के गांव छजुपुरा सादात के उलेमा, मोमिनों एवं धार्मिक-वैज्ञानिक वर्ग ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने मरहूम के लिए बुलंदी-ए-दरजात और मगफिरत की दुआ की।
जारी शोक संदेश में कहा गया कि आयतुल्लाह शुबैरी ज़ंजानी मिल्लत का अनमोल सरमाया थे। उनकी विद्वतापूर्ण एवं धार्मिक सेवाएं किसी परिचय की मोहताज नहीं थीं। उन्होंने अपना पूरा जीवन आले मोहम्मद (अ.) की सेवा, अध्यापन, शोध, धार्मिक वक्तव्यों और प्रचार-प्रसार में समर्पित किया। हजरत फातिमा मासूमा (स.) के हरम, कुम से भी लंबे समय तक जुड़े रहकर उन्होंने धार्मिक एवं शैक्षणिक सेवाएं प्रदान कीं।
उलेमा और मोमिनों ने कहा कि आयतुल्लाह ने शुबैरी ज़ंजानी अपनी विद्वता और शिक्षण के माध्यम से ऐसी अनेक विशिष्ट हस्तियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिन पर मिल्लत को गर्व है। इनमें वर्तमान रहबर-ए-मुअज्जम आयतुल्लाह मुजतबा खामेनेई, आयतुल्लाह मुस्तफा खामेनेई, आगा हसन खुमैनी सहित अन्य प्रमुख हस्तियों के नाम शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि लगभग एक सदी से रोशनी बिखेर रहा इल्म और फिकाहत का यह चिराग आखिरकार 8 रबीउल आखिर 1447 हिजरी को सरजमीन-ए-कुम पर बुझ गया। उनके निधन से पैदा हुआ यह खालीपन आसानी से पूरा नहीं किया जा सकता। उनके इंतकाल से उम्मत, विशेष रूप से धार्मिक एवं शैक्षणिक जगत में शोक की लहर है।
अंत में छजुपुरा सादात के उलेमा एवं मोमिनों ने अल्लाह तआला से दुआ की कि वह आयतुल्लाह शुबैरी ज़ंजानी के दर्जात बुलंद फरमाए, उनकी तमाम धार्मिक एवं शैक्षणिक सेवाओं को अपनी बारगाह में कबूल फरमाए और उन्हें पैगंबर-ए-अकरम (स.) तथा उनके पाक अहलेबैत (अ.) के साथ महशूर फरमाए। आमीन।












