नमाज़ सशस्त्र बलों में आध्यात्मिकता और वैश्विक साम्राज्यवाद के मुकाबले शक्ति का मुख्य आधार है

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नमाज़ सशस्त्र बलों में आध्यात्मिकता और वैश्विक साम्राज्यवाद के मुकाबले शक्ति का मुख्य आधार है

हुज्जतुल इस्लाम वल-मुस्लिमीन तक़ी रूहानी ने ईमान और शक्ति के बीच अटूट संबंध पर ज़ोर देते हुए कहा कि नमाज़ सशस्त्र बलों में आध्यात्मिकता और वैश्विक साम्राज्यवाद के मुकाबले उनकी शक्ति का मुख्य आधार है। नमाज़ से जुड़ाव बढ़ने से दुश्मन के मुकाबले सैनिकों में साहस और आत्मसम्मान भी बढ़ता है।

हुज्जतुल इस्लाम वल-मुस्लिमीन तक़ी रूहानी ने ईमान और शक्ति के बीच अटूट संबंध पर ज़ोर देते हुए कहा कि नमाज़ सशस्त्र बलों में आध्यात्मिकता और वैश्विक साम्राज्यवाद के मुकाबले उनकी शक्ति का मुख्य आधार है। नमाज़ से जुड़ाव बढ़ने से दुश्मन के मुकाबले सैनिकों में साहस और आत्मसम्मान भी बढ़ता है।

आबिक शहर के सशस्त्र बलों के लिए आयोजित “नमाज़ की प्रतिष्ठा” सम्मेलन में बोलते हुए हुज्जतुल इस्लाम तक़ी रूहानी ने कहा कि हमें वास्तविक अर्थों में नमाज़ कायम करने वालों में शामिल होना चाहिए। शहीदों, विशेष रूप से शहीद क़ासिम सुलेमानी जैसे लोगों ने समाज में वास्तविक रूप से नमाज़ को कायम किया और देश की गरिमा व शक्ति को बढ़ाया।

उन्होंने कहा कि जब भी हमने क़ुरआन और उसके आदेशों पर ध्यान दिया है, तो व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में उसके सकारात्मक प्रभाव और बरकतें देखी हैं। इसके विपरीत, जब हमने क़ुरआन से लापरवाही की, तो हमें नुकसान और समस्याओं का सामना करना पड़ा।

आबिक के इमाम ए जुमआ ने कहा कि बच्चों में नमाज़ की आदत विकसित करने में माताएं और परिवार मुख्य भूमिका निभाते हैं। यदि नमाज़ को प्रेम, माता-पिता के अच्छे व्यवहार और घर के आध्यात्मिक माहौल के साथ जोड़ा जाए, तो आने वाली पीढ़ी ईमान और आध्यात्मिकता के साथ विकसित होगी।

उन्होंने कहा कि माता-पिता का वक़्त पर नमाज़ पढ़ने को महत्व देना बच्चों में नमाज़ की आध्यात्मिक भावना को बढ़ाने और उसे विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

उन्होंने आगे कहा कि यदि माता-पिता बच्चों की सही तरबीयत और शिक्षा के तरीकों के साथ-साथ कहानी सुनाने जैसी कलात्मक विधियों तथा क़ुरआनी आयतों और हदीसों जैसे इस्लामी स्रोतों से परिचित हों, तो वे अपने बच्चों में नमाज़ के प्रति रुचि पैदा करने के लिए बेहतर माहौल तैयार कर सकते हैं।

हुज्जतुल इस्लाम रूहानी ने कहा कि क़ुरआन में नमाज़ और उससे संबंधित शब्दों का बार-बार उल्लेख हुआ है तथा नमाज़ के बारे में बड़ी संख्या में हदीसें मौजूद हैं। प्रचारक और माता-पिता इन आयतों और हदीसों को याद करके नमाज़ की संस्कृति को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि नमाज़ का मूल सार अल्लाह से संबंध स्थापित करना है। नमाज़ के शब्द और उसकी अवस्थाएं इंसान की स्वाभाविक आवश्यकताओं को पूरा करती हैं। इंसान की इन फितरी भावनाओं और अल्लाह के प्रति अपनी आवश्यकता को समझाकर इन भावनाओं को और मजबूत किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि नमाज़ के प्रचार-प्रसार का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र परिवार है। माता-पिता को बच्चों की तरबीयत में प्रयास करना चाहिए, ताकि उनके बीच नमाज़ के महत्व को स्पष्ट किया जा सके और उन्हें नमाज़ की ओर आकर्षित किया जा सके।

अंत में उन्होंने कहा कि नमाज़ सशस्त्र बलों में आध्यात्मिकता और साम्राज्यवाद के मुकाबले उनकी शक्ति को बढ़ाती है। सशस्त्र बलों का नमाज़ और आध्यात्मिकता से जितना अधिक जुड़ाव होगा, दुश्मन के मुकाबले उनमें उतना ही अधिक साहस और आत्मसम्मान पैदा होगा।

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