अल्जीरिया के विदेश मंत्री अहमद अताफ ने कहा है कि “इज़राइल” सोमालिया को विभाजित करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने सीरिया और लेबनान पर इज़राइली हमलों तथा युद्धविराम की घोषणा के बावजूद गाज़ा में फिलिस्तीनियों की लगातार हो रही मौतों की निंदा की हैं।
अल्जीरिया के विदेश मंत्री अहमद अताफ ने कहा है कि इज़राइल सोमालिया को विभाजित करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने सीरिया और लेबनान पर इज़राइली हमलों तथा युद्धविराम की घोषणा के बावजूद गाजा में फिलिस्तीनियों की लगातार हो रही मौतों की निंदा की।
अल्जीरियाई विदेश मंत्री अहमद अताफ ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि “इज़राइल” सोमालिया को विभाजित करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने सोमालिया की एकता, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के लिए अल्जीरिया के समर्थन को दोहराया।
अताफ ने कहा कि “इज़राइल क्षेत्र में अपने हमले जारी रखे हुए है जिसमें सीरिया, लेबनान और सोमालिया का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि युद्धविराम समझौते के बावजूद गाजा पट्टी में फिलिस्तीनी नागरिकों के मारे जाने का सिलसिला जारी है।
अल्जीरिया उन देशों के समूह में शामिल था, जिसने सोमालीलैंड” को इज़राइल द्वारा मान्यता दिए जाने के बाद संयुक्त बयान जारी किया था। बयान में सोमाली संघीय गणराज्य की संप्रभुता, एकता और क्षेत्रीय अखंडता के समर्थन तथा देश की एकता को प्रभावित करने वाले किसी भी कदम को अस्वीकार करने की पुष्टि की गई थी।
अताफ ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठकों के दौरान अपने सोमाली समकक्ष अब्दुस्सलाम अब्दी अली से भी मुलाकात की। दोनों पक्षों ने सोमालिया की संप्रभुता और एकता के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई तथा ऐसे बाहरी हस्तक्षेप को खारिज किया जो अफ्रीका के हॉर्न और लाल सागर क्षेत्र में तनाव बढ़ा सकते हैं।
फिलिस्तीन के मुद्दे पर अताफ ने कहा कि “इज़राइल” युद्धविराम के बावजूद फिलिस्तीनी नागरिकों की हत्या जारी रखे हुए है। उन्होंने एक “स्वतंत्र, पूर्ण संप्रभु फिलिस्तीनी राज्य, जिसकी राजधानी यरूशलम हो” की स्थापना के लिए अल्जीरिया के समर्थन को भी दोहराया।
अल्जीरियाई विदेश मंत्री ने सीरिया और लेबनान पर जारी इज़राइली हमलों की भी निंदा की और अरब देशों की संप्रभुता तथा उनकी क्षेत्रीय अखंडता के समर्थन में अल्जीरिया के रुख को स्पष्ट किया।
अताफ ने अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के कामकाज की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि दुनिया में संकट बढ़ रहे हैं, देशों के बीच विश्वास कम हो रहा है और बहुपक्षीय सहमति तथा समाधानों की जगह बल प्रयोग पर निर्भरता बढ़ रही है।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र व्यवस्था में सुधार की मांग करते हुए कहा कि इसे अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण और बदलती अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का जवाब देने में सक्षम बनाया जाना चाहिए। उनके अनुसार, अधिक न्यायपूर्ण अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के निर्माण के लिए बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार अब आवश्यक हो गया है।













