चीन ने ईरान और अमेरिका के बीच जारी मतभेदों का समाधान सैन्य या एकतरफ़ा दबाव के बजाय राजनीतिक एवं कूटनीतिक माध्यमों से करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया है। चीन ने दोनों देशों से इस्लामाबाद समझौते पर वापस लौटने और जल्द से जल्द वार्ता बहाल करने का आग्रह किया है।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोओ जियाकुन ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि, चीन शांतिपूर्ण समाधान और बातचीत के ज़रिए विवादों को सुलझाने का समर्थन करता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि ईरान और अमेरिका शांतिपूर्ण समाधान के प्रति प्रतिबद्ध रहेंगे तथा आपसी समझ के आधार पर बातचीत को आगे बढ़ाएंगे।
गोओ ने कहा कि चीन मध्य-पूर्व में युद्ध को रोकने और क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता स्थापित करने के लिए अपने प्रयास जारी रखेगा। उन्होंने कहा कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए पहले प्रस्तुत किए गए विचारों और पहलों के आधार पर बीजिंग फारस की खाड़ी क्षेत्र में शांति बहाली के प्रयास जारी रखना चाहता है।
इससे पहले राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ मुलाकात के दौरान कहा था कि चीन ईरान और अमेरिका के इस्लामाबाद समझौते पर लौटने का स्वागत और समर्थन करता है।
चीन ने अमेरिकी प्रतिबंधों पर भी कड़ा रुख व्यक्त किया है। गोओ जियाकुन ने पिछले बुधवार को उन देशों के खिलाफ अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था, जो ईरानी विमानों को अपने यहां उतरने की अनुमति देते हैं।
उन्होंने कहा कि चीन ऐसे एकतरफ़ा और अवैध प्रतिबंधों का दृढ़ता से विरोध करता है, जिनका अंतरराष्ट्रीय कानून में आधार नहीं है और जिन्हें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अधिकृत नहीं किया है। चीन के इन बयानों से स्पष्ट है कि बीजिंग ईरान के ख़िलाफ़ एकतरफ़ा प्रतिबंधों और दबाव के बजाय बातचीत, कूटनीति और आपसी समझ के माध्यम से समाधान का समर्थन कर रहा है।













