30 सितंबर 2026 को इंडियन पीपल इन सॉलिडैरिटी विद फ़िलिस्तीन (IPSP) ने मुंबई फॉर पीस के तत्वावधान में आज़ाद मैदान में आयोजित विरोध प्रदर्शन में भाग लिया। प्रदर्शन के दौरान फ़िलिस्तीन समर्थक कार्यकर्ताओं के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई और उत्पीड़न की निंदा की गई।
मुंबई फॉर पीस की ओर से डॉ. पूजा ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए एक घटना का विवरण दिया। उनके अनुसार, ग़ज़ा के बच्चों के साथ एकजुटता व्यक्त करने के लिए आयोजित वैश्विक पतंगबाजी अभियान में IPSP के स्वयंसेवकों की भागीदारी के कुछ दिनों बाद बांद्रा और विक्रोली पुलिस थानों के अधिकारियों ने IPSP से जुड़ी महिला स्वयंसेवकों के निजी आवास पर कथित रूप से गैरकानूनी छापा मारा।
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, पुलिस ने आईपीएसपी की कार्यकर्ता हर्षदा को लगभग नौ घंटे तक हिरासत में रखा। इस दौरान अन्य स्वयंसेवकों के साथ कथित रूप से दुर्व्यवहार किया गया और उनके निजी सामान तथा इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की तलाशी ली गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्वयंसेवकों को मौखिक रूप से परेशान किया गया। मुंबई फॉर पीस की एक अन्य सदस्य चायनिका ने भी कथित पुलिस कार्रवाई की निंदा करते हुए IPSP स्वयंसेवकों के साथ एकजुटता व्यक्त की।
आईपीएसपी की स्वयंसेवक हर्षदा ने अपने संबोधन में कहा कि पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में आए थे और उनके पास कोई पहचान पत्र नहीं था। उनके अनुसार, पुलिसकर्मी रात देर तक लगभग नौ घंटे तक घर की तलाशी लेते रहे और सुबह करीब तीन बजे वहां से चले गए। उन्होंने कुछ पुलिसकर्मियों के शराब के नशे में होने का भी आरोप लगाया।
हर्षदा के अनुसार, पुलिस ने घर में मौजूद कुछ वस्तुओं को ‘अनुचित’ या ‘संदिग्ध’ बताते हुए उनकी सूची तैयार की। इनमें भगत सिंह, सावित्रीबाई फुले और अन्य क्रांतिकारी व्यक्तित्वों के कथनों वाले पोस्टर भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि कथित उत्पीड़न और धमकियों के बावजूद वह फ़िलिस्तीन के साथ एकजुटता व्यक्त करना जारी रखेंगी।
दिशा स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन के अविनाश ने भी प्रदर्शन को संबोधित किया। उन्होंने ज़ायनिज़्म और भाजपा की हिंदुत्व राजनीति के बीच कथित संबंध पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि 2014 के बाद भारत और इज़राइल के संबंधों में निकटता बढ़ी है। उन्होंने भारतीय कारोबारी हितों तथा इज़राइल के साथ हथियारों और अन्य व्यापारिक समझौतों का उल्लेख करते हुए इन संबंधों की आलोचना की।
उन्होंने फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों में इज़राइली बस्तियों और फ़िलिस्तीनियों के विस्थापन के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि फ़िलिस्तीन का इतिहास 7 अक्टूबर 2023 से शुरू नहीं होता। उन्होंने लोगों से फ़िलिस्तीन के इतिहास का अध्ययन करने और फ़िलिस्तीनी जनता के साथ एकजुटता जारी रखने की अपील की।
IPSP के एक अन्य स्वयंसेवक स्वाहम ने भारत में फ़िलिस्तीन एकजुटता आंदोलन को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बॉयकॉट, डिवेस्टमेंट एंड सैंक्शंस (बीडीसए) आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके कार्यकर्ता घर-घर अभियान और जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। उनके अनुसार, यह आंदोलन कुछ भारतीय कंपनियों सहित उन कंपनियों के बहिष्कार की अपील करता है, जिन्हें वह इज़राइल के साथ सहयोग करने वाली कंपनियां मानता है।
प्रदर्शन में अमन पांडे, सृष्टि खन्ना, प्रशांत पुंडीर, हैदर, सलीम साबूवाला और मनवीन सहित कई स्वतंत्र कार्यकर्ताओं ने भी संबोधित किया और फ़िलिस्तीन के साथ एकजुटता व्यक्त की। प्रदर्शन के अंत में फ़िलिस्तीन के समर्थन में कविताएं प्रस्तुत की गईं और विभिन्न नारे लगाए गए।
IPSP के अनुसार, संगठन भारत के विभिन्न क्षेत्रों में BDS आंदोलन के संबंध में जन-जागरूकता अभियान और फ़िलिस्तीन के समर्थन में विरोध प्रदर्शन आयोजित करता है। संगठन का कहना है कि उसका उद्देश्य इज़राइल के साथ भारत के सभी संबंध समाप्त करने की मांग को लेकर देशव्यापी आंदोलन को बढ़ावा देना है।













