इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) के प्रमुख कमांडर के एक वरिष्ठ सलाहकार ने कहा है कि, अमेरिका के हित में यही होगा कि वह ईरान के ख़िलाफ़ अपनी आक्रामक कार्रवाई रोक दे। उन्होंने दावा किया कि, वॉशिंगटन पहले ही इस्लामिक गणराज्य के ख़िलाफ़ अपनी सैन्य क्षमताओं का पूरा इस्तेमाल कर चुका है, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली।
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) के प्रमुख कमांडर के एक वरिष्ठ सलाहकार ने कहा है कि, अमेरिका के हित में यही होगा कि वह ईरान के ख़िलाफ़ अपनी आक्रामक कार्रवाई रोक दे। उन्होंने दावा किया कि, वॉशिंगटन पहले ही इस्लामिक गणराज्य के ख़िलाफ़ अपनी सैन्य क्षमताओं का पूरा इस्तेमाल कर चुका है, लेकिन उसे सफलता नहीं मिली।
ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद-रज़ा नक़दी ने एक टेलीविजन इंटरव्यू के दौरान कहा,अगर अमेरिकी अपने हितों के अनुसार काम करते हैं, तो वे हमारे ख़िलाफ़ अपने सैन्य हमले रोक देंगे, जब तक कि वे आत्महत्या नहीं करना चाहते।
नक़दी ने कहा, पिछले सात महीनों के दौरान अमेरिका की क्षमताओं की यही पूरी सीमा थी और वह विफल रहा।” वह 28 फरवरी से 7 अप्रैल के बीच ईरान के खिलाफ हुए कथित “अमेरिकी-इस्राईली अकारण आक्रमण” और उसके बाद इस्लामिक गणराज्य को निशाना बनाकर की गई अमेरिकी कार्रवाइयों का जिक्र कर रहे थे।
उन्होंने कहा,अमेरिकी सेना वही है, जो आपने देखी है। उसने वह सब किया जो वह करना चाहती थी और अपनी सभी क्षमताओं को तैनात किया। इसके आगे उसके पास कुछ नहीं है। नक़दी ने दोनों पक्षों के बीच उपलब्ध संसाधनों की तुलना करते हुए सवाल किया कि अमेरिका और इस्राईल अपने तमाम संसाधनों के बावजूद क्यों विफल रहे।
उन्होंने सवाल किया,अमेरिका का सैन्य बजट हमारा सैन्य बजट से 100 गुना अधिक है और ज़ायोनी शासन खुद को दुनिया की चौथी सबसे बड़ी शक्ति होने का दावा करता है। [तो] फिर वे इन सभी क्षमताओं के बावजूद क्यों हार गए?”
उन्होंने कहा कि,अमेरिकी जनता को संबोधित करके IRGC द्वारा हाल ही में भेजे गए पत्र में इसी तरह के बुनियादी सवालों पर ध्यान केंद्रित किया गया है कि ईरान किस तरह विजयी हुआ।
मंगलवार को IRGC ने अमेरिकी जनता के नाम एक पत्र जारी किया था। खबर के अनुसार, इस पत्र में ईरान की जीत के कई पहलुओं को गिनाया गया, जिनमें पूरे क्षेत्र में अमेरिकी हितों के ख़िलाफ़ किए गए कई कथित सफल जवाबी हमले, ईरान द्वारा होर्मुज़ जलडमरूमध्य को सफलतापूर्वक बंद करना और अमेरिकी “संज्ञानात्मक तथा सांस्कृतिक युद्ध” का सामना करते हुए ईरान की सफलता शामिल है।
नक़दी ने कहा, उम्मीदों के विपरीत, अधिकांश प्रमुख समाचार एजेंसियों ने अमेरिकी जनता के नाम IRGC का पत्र प्रकाशित किया और कई अमेरिकी समाचारपत्रों ने भी इस पत्र को सकारात्मक सुर्खियों के साथ प्रकाशित किया। उन्होंने अमेरिका के अफ़ग़ानिस्तान में अनुभव को सैन्य ख़र्च और उसके परिणाम के बीच अंतर का उदाहरण बताया।
उन्होंने कहा,अमेरिका ने अफ़ग़ानिस्तान में 3 ट्रिलियन डॉलर खर्च किए और अब उसका झंडा अफ़ग़ान लोगों के पैरों तले है।” सलाहकार ने ईरान की कथित निर्णायक जवाबी कार्रवाई के परिणामस्वरूप अमेरिकी नौसैनिक बलों की मौजूदा तैनाती के तरीके का भी उल्लेख किया।













