कोई भी समाज निराशा के साथ तरक्की नहीं कर सकता।

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कोई भी समाज निराशा के साथ तरक्की नहीं कर सकता।

 हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन गुलाम रज़ा पहलवानी ने कहा कि कोई भी समाज निराशा के सहारे प्रगति नहीं कर सकता। जो राष्ट्र अपनी क्षमताओं और ईश्वरीय सहायता पर विश्वास रखता है, वह कठिनाइयों के सामने रुकता नहीं है। समस्याओं पर काबू पाने के लिए हमें ईमान, उम्मीद और जिम्मेदाराना तरीके से अपने अधिकारों की मांग इन तीनों के संयोजन की आवश्यकता है।

हुज्जतुल इस्लाम गुलाम रज़ा पहलवानी ने इस शहर के शहीद इमाम ख़ामेनेई (र.ह.) चौक, पूर्व चौक पर आयोजित कशान की जनता की 217वीं सभा में कहा कि ऐतिहासिक अवसरों पर कशान की जनता की विशेष भूमिका रही है। उन्होंने इस सभा को उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए जनता के दृढ़ संकल्प और इच्छाशक्ति का प्रतीक बताया और कहा कि कोई भी तूफान इस राष्ट्र की नाव को सम्मान और गौरव के रास्ते से नहीं हटा सकता।

उन्होंने कहां की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए कहा कि आज ‘जानफिदाई’ केवल एक सैन्य शब्द नहीं रह गया है, बल्कि यह ईरानी जनता की सामाजिक जिम्मेदारी का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि शहीदों और प्रतिरोध के शहर के रूप में कशान के पास समृद्ध सामाजिक पूंजी मौजूद है और यह शहर प्यारे ईरान की प्रगति का प्रेरक इंजन बन सकता है। इस क्षमता को और अधिक मजबूत करने की आवश्यकता है।

कशान के इमाम ए जुमा ने अपने भाषण के दूसरे हिस्से में मौजूदा परिस्थितियों में दुश्मनों की रणनीति की ओर इशारा करते हुए कहा कि आज दुश्मन इस राष्ट्र में फूट पैदा करने, निराशा फैलाने और लोगों को थका देने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

हुज्जतुल इस्लाम वल-मुस्लिमीन पहलवानी ने कहा कि जनता की इस सभा में भागीदारी दुश्मनों की साजिशों को विफल करने का स्पष्ट संदेश है। इससे साबित होता है कि ईरानी राष्ट्र जीवंत, जागरूक और अपने भविष्य को अपने हाथों से बनाने के लिए दृढ़ संकल्पित है।

उन्होंने कहा कि लोगों की रोजमर्रा की समस्याएं और आर्थिक दबाव किसी से छिपे नहीं हैं। हम देश की समस्याओं के प्रति उदासीन नहीं हैं और जनता की चिंताओं को अच्छी तरह सुनते हैं, लेकिन ‘समस्या को देखना’ और ‘उसके सामने आत्मसमर्पण कर देना’ इन दोनों में अंतर करना ज़रूरी है।

उन्होंने जोर देकर कहा,हम समस्याओं से इनकार करने वाले नहीं हैं, लेकिन अपनी दूरदर्शिता और समझ के बल पर हम आत्मसमर्पण भी नहीं करेंगे।

मश्कात के इमामे जुमआ ने कहा कि हम अपनी मांगों को जिम्मेदाराना तरीके से उठाने के पक्षधर हैं, लेकिन हम यह अनुमति नहीं देंगे कि यह मांग मतभेद और जनता के आपसी विश्वास के टूटने का कारण बने।

अंत में हुज्जतुल इस्लाम वल-मुस्लिमीन पहलवानी ने इस जनसभा को एक नए संकल्प और वचन के साथ समाप्त करने का आह्वान किया। उन्होंने जनता से एकता बनाए रखने, दुश्मन के मनोवैज्ञानिक युद्ध के प्रति सतर्क रहने और ईरान की प्रतिष्ठा एवं गौरव के लिए जिम्मेदारी के साथ डटे रहने का आह्वान करते हुए कहा कि इसी एकता के माध्यम से देश का भविष्य बनाया जाएगा।

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