यमन के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के प्रमुख अली तैसीर ने कहा है कि ताज़ प्रांत में सशस्त्र बलों के शहीदों के शवों की बेअदबी, उन्हें निर्वस्त्र करने, उनकी तस्वीरें बनाने और उन्हें प्रसारित करने की घटना गंभीर युद्ध अपराध है। उन्होंने कहा कि इसके जिम्मेदार लोगों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
यमन के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के प्रमुख अली तैसीर ने सोमवार को कहा कि ताज़ प्रांत में सशस्त्र बलों के शहीदों के शवों के साथ कथित तौर पर की गई बेअदबी और उन्हें निर्वस्त्र करने की घटना गंभीर युद्ध अपराध तथा मानव गरिमा का गंभीर उल्लंघन है।
उन्होंने कहा कि इन लोगों द्वारा किया गया कृत्य इस्लाम की धार्मिक शिक्षाओं और यमन की जनजातीय परंपराओं के भी विरुद्ध है। मृतकों की गरिमा को ठेस पहुंचाना, उनके शवों की तस्वीरें लेना और उन्हें प्रकाशित करना इस बात को दर्शाता है कि आरोपित लोगों ने सम्मान और मानवीय गरिमा के बुनियादी मानकों की भी अनदेखी की है।
अली तैसीर ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून मृतकों के शवों के सम्मान और उनकी सुरक्षा को अनिवार्य करता है तथा उनकी बेअदबी पर रोक लगाता है। उन्होंने इसके लिए जिनेवा कन्वेंशन के संबंधित प्रावधानों का उल्लेख किया।
उन्होंने आगे कहा कि रोम संविधि के तहत भी मानव गरिमा पर हमला और अमानवीय व्यवहार, परिस्थितियों के अनुसार, युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकते हैं।
उन्होंने कहा कि पैग़म्बरे इस्लाम (स.) की शिक्षाओं में भी दुश्मनों के शवों की बेअदबी से मना किया गया है।
यमन के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के प्रमुख ने सऊदी शासन पर इन सशस्त्र समूहों को कथित रूप से आर्थिक सहायता और समर्थन देने का आरोप लगाते हुए उसे भी इस घटना के लिए जिम्मेदार बताया।
अली तैसीर ने ताज़ की जनजातियों से इस घटना की निंदा करने और इसके जिम्मेदार लोगों से दूरी बनाने की अपील की। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय से भी आरोपित लोगों तथा उनके कमांडरों को युद्ध अपराधियों की सूची में शामिल करने की मांग की।
उन्होंने अंत में कहा कि आयोग ने इस घटना का ऑडियो-विजुअल दस्तावेज तैयार किया है, जिसे अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके।













