हज़रत अली अलैहिस्सलाम का शहादत दिवस, शोक में डूबे श्रद्धालु

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हज़रत अली अलैहिस्सलाम का शहादत दिवस, शोक में डूबे श्रद्धालु

हज़रत अली अलैहिस्सलाम के शहादत दिवस के अवसर पर पैग़म्बरे इस्लाम और उनके परिजनों से गहरी श्रद्धा रखने वाले मुसलमान शोक में डूब गए हैं।

इस्लमी गणतंत्र ईरान में मंगलवार की रात से ही नौहा और मजलिस का सिलसिला शुरू हो गया जो लगातार जारी है। पवित्र नगर मशहद में जहां पैग़म्बरे इस्लाम के पौत्र हज़रत इमाम अली रज़ा अलैहिस्सलाम का मज़ार है, इसी प्रकार पवित्र नगर क़ुम में जहां इमाम अली रज़ा अलैहिस्सलाम की बहन का मज़ार है, मस्जिदों, इमाम बारगाहों तथा धार्मिक स्थलों में शोक सभाएं जारी हैं जिनमें हज़रत अली अलैहिस्सलाम की जीवनशैली तथा उन पर इब्ने मुल्जिम नामक दुष्ट व्यक्ति के हमले की घटना को बयान किया जा रहा है।

तेहरान के इमाम ख़ुमैनी इमामबाड़े में मजलिस हुई जिसमें इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनई ने भी भाग लिया देश के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित हुए।

इराक़ में पवित्र नगर नजफ़ और उससे लगे कूफ़ा शहर में श्रद्धालुओं का बहुत बड़ा मजमा लगा हुआ है। लोग हज़रत अली अलैहिस्सलाम के रौज़े पर पहुंचे हैं जबकि श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। पवित्र नगर कर्बला, काज़मैन, अलबलद और सामर्रा में भी हज़रत अली अलैहिस्सलाम के सिर पर नमाज़ की हालत में होने वाले हमले की बर्स के उपलक्ष्य में शोक सभाओं का आयोजन किया गया है और अंजुमनें मातमी जुलूस निकाल रही हैं।

लेबनान, सीरिया तथा अन्य अरब देशों इसी प्रकार पश्चिमी देशों में हज़रत अली अलैहिस्सलाम के शहादत दिवस पर शोक सभाओं का सिलसिला जारी है।

भारत और पाकिस्तान से हमारे संवाददाताओं ने रिपोर्ट दी है कि सभी छोटे बड़े शहरों और गावों में हज़रत अली अलैहिस्सलाम की याद में शोक सभाओं का आयोजन किया गया है और मातमी जुलूस निकाले गए हैं। लखनऊ से हमारे संवाददाता ने बताया कि गेलीम का ताबूत निकाला गया जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

पाकिस्तान में कराची, इस्लामाबाद, लाहौर, सहित छोटे बड़े शहरों में शोक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है।

भारत में भी मुंबई, दिल्ली, लखनऊ, हैदराबाद और कोलकाता सहित लगभग सभी छोटे बड़े शहरों में जुलूस निकाले गए।

मंगलवार की रात को लोगों ने क़द्र की रात की विशेष उपसानाएं कीं और दुआएं पढ़ी साथ ही हज़रत अली अलैहिस्सलाम का शोक मनाया जिन्हें 19 रमज़ान की सुबह नमाज़ की हालत में हमला करके इब्ने मुलजिम नामक दुष्टि व्यक्ति ने घायल कर दिया और 21 रमज़ान की सुबह हज़रत अली अलैहिस्सलाम शहीद हो गए।

 

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