रामपुर, हज़रत अली और इमाम जाफ़र सादिक़ के हाथ से लिखे क़ुरआन पहली बार प्रदर्शनी के लिए रखे गए, लोगों का बंधा तांता

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रामपुर, हज़रत अली और इमाम जाफ़र सादिक़ के हाथ से लिखे क़ुरआन पहली बार प्रदर्शनी के लिए रखे गए, लोगों का बंधा तांता

 रामपुर की ऐतिहासिक रज़ा लाइब्रेरी ने पवित्र रमज़ान के महीने में क़ुरआन के नवीनतम संग्रह की प्रदर्शनी का आयोजन किया है।

इस प्रदर्शनी को देखने के लिए आम लोगों से लेकर विद्वानों तक का तांता लगा हुआ है। रज़ा लाइब्रेरी दक्षिण एशिया में प्राचीन हस्तलिपियों के संग्रह के लिए प्रसिद्ध है।

लाइब्रेरी के प्रमुख प्रोफ़ैसर सैय्यद हसन अब्बास का कहना है कि लाइब्रेरी ने पहली बार अपने क़ुरआन संग्रह का प्रदर्शन किया है और वह भी रमज़ान के महीने में।

लाइब्रेरी में 13वीं शताब्दी में बग़दाद के प्रसिद्ध सुलेखक याक़ूत मुसतासेमी द्वारा लिखा गया क़ुरआन भी मौजूद है। यह क़ुरआन सोने और अनमोल लापीस लाजुली (lapis lazuli) से जड़ा हुआ है।

प्रदर्शनी के लिए रखी गई कुछ हस्तलिपियां अरबी सुलेखन के सबसे पुराने नमूनों में से हैं।

सातवीं शताब्दी में हज़रत अली के हाथ से चमड़े पर लिखा गया एक क़ुरआन भी इस प्रदर्शनी में रखा गया है। इस अनमोल क़ुरआन की ज़ियारत के लिए लोगों को लम्बी लम्बी लाईनों में लगना पड़ रहा है।

इसके अलावा आठवीं शताब्दी से संबंधित इमाम जाफ़र सादिक़ (अ) के हाथ से लिखा हुआ क़ुरआन भी प्रदर्शनी के लिए रखा गया है, यह इमाम जाफ़र सादिक़ (अ) की अद्वितीय शिल्पकला का नमूना है।  

 

 

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