विलायत-ए-फ़क़ीह के साये में इत्तेहाद और वहदत दौर-ए-ग़ैबत के अहम फ़राइज़ में से है

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विलायत-ए-फ़क़ीह के साये में इत्तेहाद और वहदत दौर-ए-ग़ैबत के अहम फ़राइज़ में से है

हुज्जतुल इस्लाम मुर्तुज़ा आका तेहरानी ने कहा कि विलायत-ए-फ़क़ीह के साये में एकता और इत्तेहाद, दौर-ए-ग़ैबत में हमारी महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारियों में से है। आज चाहे जंग हो, बातचीत हो या कोई अन्य मामला, वह वली-ए-फ़क़ीह के हुक्म के अनुसार होना चाहिए।

 हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मुरतज़ा आगा तेहरानी ने हरम ए हजरत मासूमा में आयोजित एक मारिफ़ती बैठक में कहा कि हर इंसान को उसकी उम्र और परिस्थितियों के अनुसार अवसर मिलता है, और उसे उस अवसर में अपनी ज़िम्मेदारियों को पूरा करने का प्रयास करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हम सब अल्लाह तआला की मख़लूक़ हैं। हमारे पास जो कुछ भी है, वह अल्लाह की अमानत है और मृत्यु के बाद दूसरों तक पहुँच जाएगा।

हज़रत मासूमा (स.ल.) के हरम के ख़तीब ने कहा कि वास्तविक सफलता उसी व्यक्ति को मिलेगी जो अपने साथ नेक आमाल लेकर जाए और अपनी क्षमता के अनुसार बंदगी का हक़ अदा करे।

उन्होंने कहा कि चूँकि अल्लाह ही ख़ालिक़ है, इसलिए आज्ञापालन भी केवल उसी का होना चाहिए। इंसान को अपनी हर चीज़ को ख़ुलूस के साथ अल्लाह के लिए समर्पित रखना चाहिए और यही दुनिया में उसका कर्तव्य है।

हुज्जतुल इस्लाम आगा तेहरानी ने कहा कि इंसान को अपनी ज़िंदगी वाजिबात की अदायगी में लगानी चाहिए। जब तक वाजिबात पूरे न हो जाएँ, तब तक मुस्तहबात में अधिक व्यस्त नहीं होना चाहिए।

उन्होंने अंत में कहा कि विलायत-ए-फ़क़ीह के साये में वहदत और इत्तेहाद, दौर-ए-ग़ैबत के अहम फ़राइज़ में से है। आज चाहे जंग हो, मुज़ाकरात हों या कोई भी महत्वपूर्ण घटना, उसका निर्णय वली-ए-फ़क़ीह के मार्गदर्शन और हुक्म के अनुसार होना चाहिए।

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