डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों ईरान के दुश्मन हैं

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डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों ईरान के दुश्मन हैं

मशहद के इमाम जुमआ आयतुल्लाह सय्यद अहमद अलमुलहुदा ने कहा कि अमेरिका की डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों पार्टियां ईरान की दुश्मन हैं और उनकी नीतियों में कोई बुनियादी अंतर नहीं है। ईरानी जनता को अतीत की गलतियों से सबक लेते हुए अमेरिका की किसी भी राजनीतिक पार्टी पर भरोसा नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि ईरान की सफलता तीन महत्वपूर्ण कारकों का परिणाम है। पहला, सर्वोच्च नेता की दूरदर्शी नेतृत्व क्षमता, दूसरा, मुजाहिदीन की कुर्बानी और निष्ठा तथा तीसरा, जनता की दृढ़ता और स्थिरता।

मशहद के इमाम जुमा और खुरासान रिज़वी में प्रतिनिधि वली-ए-फ़क़ीह आयतुल्लाह सय्यद अहमद अलमुलहुदा ने आज हरम इमाम रज़ा (अ.स.) के रिवाक़ इमाम ख़ुमैनी में नमाज़े जुमा के खुत्बे के दौरान कहा कि 13 आबान 1358 हिजरी शम्सी को अमेरिका की डेमोक्रेटिक पार्टी और 13 आबान 1405 को रिपब्लिकन पार्टी को शिकस्त का सामना करना पड़ा। उनके अनुसार, अमेरिका की दोनों राजनीतिक पार्टियां वास्तव में साम्राज्यवादी व्यवस्था के दो चेहरे हैं।

उन्होंने कहा कि डेमोक्रेटिक पार्टी धोखे और चालाकी के जरिए अपनी दुश्मनी जाहिर करती है, जबकि रिपब्लिकन पार्टी खुली सख्ती, हिंसा और बेरहमी का रास्ता अपनाती है। इसलिए इन दोनों में से किसी एक को ईरान का मित्र समझना राजनीतिक भूल होगी।

आयतुल्लाह अलमुलहुदा ने 13 आबान 1358 हिजरी शम्सी को अमेरिकी दूतावास पर कब्जे की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि इस कदम से ईरान को अमेरिका के मुकाबले एक महत्वपूर्ण अवसर मिला था। लेकिन उस समय कुछ लोगों ने यह सोचकर अमेरिकी बंधकों को रिहा करने का फैसला किया कि डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति जिमी कार्टर की पार्टी चुनाव में सफल होगी और ईरान के प्रति अमेरिकी दुश्मनी कम हो जाएगी।

इस गलतफहमी के परिणामस्वरूप ईरान ने अपना एक महत्वपूर्ण अवसर गंवा दिया। बाद में ऐसे समझौते किए गए, जिनके जरिए ईरान की संपत्तियां फ्रीज कर दी गईं और देश पर प्रतिबंध लगाए गए।

उन्होंने कहा कि परमाणु समझौता भी डेमोक्रेटिक सरकार के कार्यकाल में हुआ, जिसमें ईरान की परमाणु क्षमताओं को सीमित किया गया। अराक के भारी पानी वाले परमाणु संयंत्र की परियोजना को भी नुकसान पहुंचाया गया। इसके बाद अमेरिका ने स्वयं इस समझौते का उल्लंघन करते हुए ईरान पर नए प्रतिबंध लगा दिए। इसलिए आज भी अमेरिका की किसी राजनीतिक पार्टी की चुनावी सफलता को ईरान की सफलता समझना सही नहीं है।

मशहद के इमाम जुमा ने ईरानी अधिकारियों से अपील की कि वे साम्राज्यवाद के खिलाफ संघर्ष में सर्वोच्च नेता के साथ मजबूती से खड़े रहें और अतीत की गलतियों को दोबारा न दोहराएं। उन्होंने जनता से भी आग्रह किया कि वह अमेरिका के मुकाबले सम्मान, शक्ति और दृढ़ता के साथ डटी रहे।

आयतुल्लाह अलमुलहुदा ने कहा कि ईरान ने इस संघर्ष में बड़ी कुर्बानियां दी हैं और सबसे बड़ा नुकसान रहबर-ए-इंकलाब की शहादत है। इसके बावजूद तमाम कठिनाइयों और चुनौतियों का सामना करते हुए ईरान आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक सफल देश के रूप में उभरा है।

उन्होंने ईरान की सफलता के तीन बुनियादी कारण बताते हुए कहा कि पहला कारण सर्वोच्च नेता का दूरदर्शी नेतृत्व है, जिन्होंने विभिन्न अवसरों पर समयानुकूल मार्गदर्शन देकर परिस्थितियों को सही दिशा दी। दूसरा कारण मुजाहिदीन की निष्ठा, बहादुरी और कुर्बानी का जज्बा है, जो अपनी जान की परवाह किए बिना देश और धर्म की रक्षा में जुटे हुए हैं। तीसरा कारण जनता की दृढ़ता, मैदान में उसकी मौजूदगी और इस्लामी व्यवस्था के प्रति उसका समर्थन है।

उन्होंने कहा कि इन तीनों कारकों ने अल्लाह की मदद से ईरान को सफलता दिलाई है। अंत में उन्होंने दुआ की कि अल्लाह तआला ईरान की सफलताओं में और वृद्धि करे, रहबर-ए-मुअज्जम का साया ईरानी राष्ट्र पर कायम रखे और हज़रत इमाम मेंहदी (अ.ज.) के ज़ुहूर में जल्द से जल्द ताजील फरमाए।

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